Wednesday, February 28, 2024
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उत्तराखंड में बसेगा करोड़पति मोती , रानी , फूलमाला और गुलाबकली का अनोखा गाँव 

हांथी मेरे साथ फिल्म तो आपने देखी ही होगी ….इस फिल्म में इंसान और हांथी के अटूट भावुक रिश्ते को बड़ी खूबसूरती से दर्शाया गया था। बिहार में भी असल ज़िंदगी की एक कहानी लोगों के दिलों को छू गयी जब बिहार में पांच करोड़ की बेशकीमती जमीन अपने अज़ीज़ बेजुबान हाथियों के नाम करने वाले अख्तर इमाम के बारे में लोगों ने सुना और देखा।  वही हांथियों के अभिभावक अख्तर इमाम अब उत्तराखंड के रामनगर में हाथी गांव बसाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने सांवल्दे में 26 बीघा जमीन लीज पर ले कर हांथी गाँव बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। 


बिहार की राजधानी पटना के दानापुर जानीपुर के गांव मीरग्यासचक के रहने वाले सैय्यद आलम के पुत्र अख्तर इमाम हाथियों के संरक्षण में जुटे हैं। बिहार में उन्होंने इसके लिए खूब काम किया। एरावत संस्था बनाई और अपनी 50 एकड़ जमीन संस्था के नाम कर दी। इस संस्था से कई महावत जुड़े हैं। 2018 में वह रामनगर आ गए और यहां सांवल्दे गांव में 26 बीघा जमीन लीज पर लेकर  हाथियों के संरक्षण का काम शुरू कर दिया।

यहां हाथियों के रहने के लिए टिन शेड, बिजली, सोलर फेंसिंग, नहलाने के लिए मोटर की व्यवस्था की। खाली पड़ी जमीन पर हाथियों के चारे को चरी उगाई गई है। इस समय यहां मोती नाम के हाथी और रानी हथिनी को पाला जा रहा है। ढिकुली में भी दो हथिनी फूलमाला और गुलाबकली की देखरेख की जा रही है। इन दोनों हथिनियों को भी जल्द ही सांवल्दे लाया जाएगा। 

अख्तर इमाम यहां पर दिन-रात हाथियों की सेवा में लगे रहते हैं। उनके साथ पांच अन्य लोग भी इस काम से जुड़े हैं। सभी की अलग-अलग जिम्मेदारी है। अख्तर के अनुसार वह हाथियों के लिए बड़ा काम करना चाहते हैं, इसलिए रामनगर आए हैं। सांवल्दे में वह एक हाथी गांव बसाना चाहते हैं, जिसमें बुजुर्ग और बीमार या दिव्यांग हो चुके हाथियों को रहने की जगह मिल सकेगी। अख्तर ने राज्य सरकार और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को पत्र लिखकर हाथी गांव को पीपीपी मोड में चलाने की मांग की है।

चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं को पत्र लिखकर नियमानुसार कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। अख्तर इमाम बताते हैं कि उनकी पिताजी भी हाथी पाला करते थे। इसलिए बचपन से ही वह हाथियों के करीब रहे।

एक बार उन पर जानलेवा हमला किया गया था, लेकिन हाथियों ने उन्हें बचा लिया था। पिस्तौल हाथ में लिए बदमाश जब उनके कमरे की तरफ बढ़ने लगे तो हाथी इसे देखकर चिंघाड़ने लगे। इसी बीच उनकी नींद खुल गई और शोर मचाने पर बदमाश भाग निकले। अख्तर ने बताया कि हाथियों के नाम जमीन करने पर एक बेटे ने एतराज किया तो उसे संपत्ति से बेदखल कर दिया है। एक बेटा विदेश में है। बेटी की शादी कर चुके हैं। 

आज इंसान एक-एक इंच जमीन के लिए संघर्ष कर रहा है, ऐसे में हाथियों के लिए जगह कम होती जा रही है। इसके लिए हर किसी को सोचना चाहिए। अगर हाथियों का संरक्षण नहीं किया गया तो हमारी अगली पीढ़ी इस विशाल जानवर को किताबों में ही पढ़ा करेगी। लेकिन समय रहते अगर हमने अख्तर इमाम जैसे पशु प्रेमियों से सबक ले सके तो इन जानवरों को बचाने में अहम किरदार साबित हो सकते हैं 

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