Saturday, April 13, 2024
उत्तराखंड

H3N2  इंफ्लूएंजा वायरस ने उत्तराखंड में दी दस्तक, हल्द्वानी में मिले दो केस

कोरोना के बाद अब सीजनल इंफ्लूएंजा के बढ़ते मामले चिंता का विषय बन रहे हैं। वहीं एच3एन2 इंफ्लूएंजा वायरस ने अब उत्तराखंड में भी दस्तक दे दी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी की लैब में दो मरीजों में एच3एन2 वायरस की पुष्टि हुई है। इनकी जांच मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग में कराई गई थी। इसकी सूचना स्वास्थय विभाग को दे दी गई है।वहीं माइक्रोबायलॉजी विभाग में अब बुखार और सर्दी-जुकाम के मरीजों के सैंपलों की जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। एसटीएच के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ परमजीत सिंह ने बताया कि लगभग रोज ही तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी, सर्दी-जुकाम के लगभग 30 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर मरीजों का इलाज चिकित्सीय परामर्श के बाद घर पर ही किया जा रहा है। माइक्रोबायलॉजी विभाग के एचओडी डॉ उमेश का कहना है कि जिनकी प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी, उनको वायरस ज्यादा प्रभावित नहीं करेगा। ऐसे में इसे लेकर घबराने की जरुरत नहीं है।

आइसोलेशन वार्ड के निर्देश दिए: सीएमओ

सीएमओ डॉ भागीरथी जोशी ने बताया कि सभी अस्पतालों में दवाइयां उपलब्ध हैं। मेडिकल कॉलेज में जांच की सुविधा भी है। अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर लगातार मॉनिटिरिंग भी की जाएगी।

वहीं स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ विनीता शाह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि चिकित्सालय स्तर पर इंफ्लूएंजा, एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन की सघन निगरानी की जाए तांकि शुरुआती चरण में ही मामले चिन्हित कर इंफ्लूएंजा को प्रसारित होने से रोका जा सके।

क्या है इंफ्लुएंजा वायरस?

मौसमी इंफ्लूएंजा, वायरस की वजह से होने वाला सांस का तेज संक्रमण है, जो दुनिया के सभी हिस्सों में फैलता है। भारत में हर साल सीजनल एंफ्लुएंजा दो बार चरम पर होता है।

क्या हैं लक्षण?

विशेषज्ञों के अनुसार वायरस के मरीजों में नाक बहना, तेज बुखार, खांसी,गले में खराश, छाती में जकड़न, मांसपेशी-जोड़ों में दर्द, सिरदर्द जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं।

गर्भवती महिलाओं, पांच साल से कम उम्र के बच्चों, बुजुर्गों और सांस और दमा के मरीजों को खास ध्यान रखने की जरुरत है।

कैसे करें बचाव?

मास्क पहन कर रखें और भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। अपनी आंखों और नाक को बार-बार छूने से बचें। खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को ढकाकर रखें। बुखार या सरदर्द होने पर पैरासिटामोल ले सकते हैं। ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें और दूसरों से हाथ मिलाने से बचें। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर न थूकें।

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