Monday, June 24, 2024
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गुरु नानक जयंती 2021 : सिख धर्म के पहले गुरु की जयंती पर जानिए उनसे जुडी ये ख़ास बातें

गुरु नानक जयंती सिख धर्म में सबसे शुभ और महत्वपूर्ण त्यौहार होता हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक मास की पूर्णिमा की तिथि को गुरुनानक जी की जयंती मनाई जाती हैं। बता दें कि इस वर्ष गुरु नानक की जयंती 19 नवंबर के दिन गुरुवार को मनाई जा रही हैं। इसी दिन को गुरु पूर्णिमा के पर्व के नाम से भी जाना जाता हैं। गुरु नानक देव सिखों के सबसे पहले गुरु थे और माना जाता हैं कि इन्होने ही सिख धर्म की संस्थापना की थी। इस वर्ष 2021 में गुरु नानक की 552वीं जयंती हैं। गुरु नानक जयंती के एक दिन पूर्व से ही गुरुद्वारे में भजन कीर्तन किये जाते हैं और गुरु नानक जयंती के दिन गुरूद्वारे में लंगर बांटा जाता हैं। आपको बता दें कि इस दिन सुबह प्रभात फेरियां निकली जाती हैं, साथ ही गुरूद्वारे में कीर्तन भजन का भी आयोजन किया जाता हैं।

गुरुनानक जी ने अपना सारा जीवन शिक्षा और धर्म के लिए समर्पित किया था साथ ही उनकी शिक्षाएं न केवल धर्म विशेष के लिए बल्की पूरी मानव जाति को सही दिशा दिखाती हैं। इसलिए ही उनके जन्म दिवस को प्रकाश पर्व के नाम से जाना जाता है। उनका जन्म स्थान वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था। आज भी सभी लोग उनकी दी गयी शिक्षाओं के उपदेशों पर चलते हैं, लोग हर्षोल्लास के साथ गुरुनानक जी का जन्मदिवस मनाते हैं और एक दूसरे को बधाइयां देते हैं।

अखंड पथ : गुरु नानक जयंती से दो दिन पहले, गुरु ग्रंथ साहिब, सिखों के पवित्र ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहिब का 48 घंटे का गैर-रोक वाला पाठ गुरुद्वारों में आयोजित किया जाता है।
नागरकीर्तन : जन्मदिन से एक दिन पहले, नगरकीर्तन के रूप में जाना जाने वाला एक जुलूस आयोजित किया जाता है, जिसका नेतृत्व पंज प्यारों द्वारा सिख ध्वज लेकर किया जाता है, जिसे निशांत साहिब और गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी (पालकी) के रूप में जाना जाता है।

 

 

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