Monday, April 22, 2024
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Corona से बचाने वाली Monkey  Head मशरूम से जवानी रहेगी बरकरार !

अगर आप जवानी का मज़ा लेना चाहते हैं तो ये खबर आपके काम की है  ….. उत्तराखंड में है एक ख़ास किस्म की मशरूम …..जिसका नाम है मंकी  हेड मशरूम …… जी हाँ यही वो जरिया है जिससे आपकी जवानी और सेहत दोनों बरकरार रहेगी।

वैज्ञानिक और औषधियों के जानकार भी दावा करते हैं कि इसमें कई प्रकार के ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिनमें जैव सक्रिय यौगिक होते हैं जिनकी वजह से न सिर्फ आपको याददाश्त बढ़ेगी, वहीं कैंसर जैसी बीमारी भी दूर रहेगी। इसमें पाया जाने वाला ख़ास तत्व टेरपेंस तंत्रिका तंत्र की वृद्धि में बेहद कारगर माना जाता है। 

मंकी हेड मशरूम में डॉक्टर्स और रिसर्च करने वाले एक्सपर्ट बताते हैं कि इसमें बीटा ग्लूकॉन पालीसैकराइड होता है, जो तंत्रिकाओं को  न सिर्फ नया जीवन देता है बल्कि आपकी कमज़ोर पड़ती मेमोरी को भी बढ़ता है।

अगर आप इसको खाने की सोच रहे हैं तो बता दें कि इस मशरूम की कीमत 200 से 250 रुपये किलो है। एशिया के कई देशों में इसकी खेती होती है। उत्तराखंड में भी इसकी अहमियत को समझते हुए पंतनगर ुनिवडेरसिटी में ट्रेनिंग के साथ अब बीज भी भी वितरण किया जा रहा है।

अगर मंकी हेड मशरूम की खासियत की बात करें तो ताजे 100 ग्राम मंकी हेड मशरूम में प्रोटीन की मात्रा 2.4 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 3.6 तो वहीँ ऊर्जा 24 कैलोरी होती है। इस मशरूम को अगर आप लगातार खाते हैं तो  शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी तेजी से बढ़ती है। इसमें लैटीनैन नामक पॉलीसेकराइड पाया जाता है जो कैंसर, अल्सर और आंत की बीमारियों में भी लड़ने में अहम माना जाता है । इसमें पाया जाने वाला नर्व ग्रोथ फैक्टर नरवस सिस्टम जबकि सेलेनियम लीवर को मजबूत करता है।

लिपिड मेटाबोलिज्म हाजमा दुरुस्त रखता है और बेमीटिया याददाश्त को बढ़ाता है। पॉल्मेटिक अम्ल, थ्रेइटाल और डीएर्वीटिनाल रक्त में शर्करा को नियंत्रित करने में सहायता करता है। उम्र बढ़ने के साथ कमजोर हो रही याददाश्त को बढ़ाने में सहायक यह मशरूम आने वाले बुढ़ापे की गति भी धीमी करता है। इसमें पाया जाने वाला इरिटाडीनाइन नाम रासायनिक यौगिक स्टेरालस एवं बीटा ग्लूकॉन रक्त में बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और हृदय रोग के खतरे को कम करने में भी सहायक है।

उत्तराखंड में मौजूद पंत विश्वविद्यालय  के वैज्ञानिकों ने इसे प्रयोग के तौर पर उगाया और अब लोगों को प्रशिक्षण के साथ बीज मुहैया करवाकर इसकी खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।

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