Wednesday, July 17, 2024
राष्ट्रीय

Bhopal Gas Tragedy Case Verdict: SC ने खारिज की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजा देने की केंद्र की अर्जी, केंद्र से कहा- 3 दशक तक कहां थे?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भोपाल गैस त्रासदी (1984) के पीड़ितों 7 हजार 844 करोड़ रुपये अतिरिक्त मुआवजा दिलवाने की केंद्र की याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1989 में सरकार और कंपनी में मुआवजे पर समझौता हुआ, अब फिर मुआवजे का आदेश नहीं दे सकते हैं। दरअसल, केंद्र ने यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन (यूसीसी) की उत्तराधिकारी फर्मों से 7,844 करोड़ रुपये के अतिरिक्त मुआवजे की मांग को लेकर  क्यूरेटिव पिटीशन दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने 1984 भोपाल गैस त्रासदी में पीड़ितों के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए केंद्र की याचिका खारिज की है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 1989 में दिया गया मुआवजा काफी था। अगर सरकार को ज्यादा मुआवजा जरूरी लगता है तो खुद देना चाहिए था।

एएनआई के एक ट्वीट के अनुसार, यूएस-बेस्ड यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन अब डाऊ कैमिकल्स द्वारा संचालित की जाती है। एपेक्स कोर्ट ने केंद्र की क्यूरेटिव याचिका को खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि डाऊ कैमिकल्स के साथ समझौता फिर से नहीं खुलेगा।

जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ  ने मामले पर अपना फैसला सुनाया। इस पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेके महेश्वर भी शामिल हैं। संविधान पीठ ने 12 जनवरी को केंद्र सरकार की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस हादसे के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन अब डाऊ केमिकल्स (Dow Chemicals) के स्वामित्व में है। कंपनी ने इस त्रासदी के बाद 1989 में 470 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1989 में निपटान के समय 715 करोड़ रुप) का मुआवजा दिया

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- 3 दशक तक कहां थे?

गौरतलब है कि 1984 में 2 और 3 दिसंबर की रात को हुए गैस रिसाव से 3,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 1.02 लाख लोग इससे प्रभावित हुए थे। केंद्र सरकार लगातार इस बात पर जोर देती रही है कि 1989 में तय किए गए मुआवजे के समय इंसानों की मौतों, उन पर रोगों के कारण पड़ने वाले बोझ और पर्यावरण को हुए वास्तविक नुकसान की गंभीरता का ठीक से आकलन नहीं किया जा सका था। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को यूसीसी से ज्यादा मुआवजे की मांग वाली केंद्र सरकार की याचिका पर केंद्र से सवाल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार 30 साल से अधिक समय के बाद कंपनी के साथ हुए समझौते को फिर से तय करने का काम नहीं कर सकती है।

क्या थी भोपाल गैस त्रासदी?

मध्य प्रदेश के  भोपाल शहर में 3 दिसम्बर 1984 को एक भयानक औद्योगिक दुर्घटना हुई। इसे भोपाल गैस कांड या भोपाल गैस त्रासदी के नाम से जाना जाता है। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने से एक ज़हरीली गैस का रिसाव हुआ। इसके प्रभाव से बहुत सारे लोग अनेक तरह की शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए। भोपाल गैस काण्ड में मिथाइलआइसोसाइनाइट MIC नामक ज़हरीली गैस का रिसाव हुआ था। इसमें 3,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब एक लाख से ज्यादा लोग जिंदगी भर बीमारियों से जूझने को मजबूर हो गए।

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