Saturday, April 13, 2024
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उत्तराखंड – प्रॉपर्टी टैक्स चोर भवन मालिकों के आशियाने को नापेगा ड्रोन 

बीस साल पहले जिस राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों की अनगिनत शहादत के बाद हुआ था आज जब वही राज्य स्थापना के दो दशक पूरे कर रहा है तो उत्तराखंड सरकार ड्रोन कैमरे के ज़रिये चोर तलाशने की तैयारी कर रही है। ये चोर सरकारी राजस्व की चोरी करने वाले हैं जो नगर निगम में हाउस टैक्स की बड़े पैमाने पर चोरी कर रहे हैं। इसकी शुरुआत भी तब हो गयी जब शहरी विकास निदेशालय ने प्रदेश के शहरों की ड्रोन से जीआईएस मैपिंग  के लिए ठेका दे दिया गया …..  और अब उत्तराखंड में चार शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जीआईएस मैपिंग शुरू की जाएगी 

सरकार का भी यही मानना है की कई नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपनी प्रॉपर्टी का टैक्स देने में कंजूसी करते हैं जिसका नुक्सान सबसे ज्यादा सरकार के राजस्व पर हो रहा है। इसमें राजधानी देहरादून और कुछ बड़ी आबादी वाले जिले भी शामिल हैं …  इन सभी जगहों पर एक-एक प्रॉपर्टी को चिन्ह्ति करने का काम बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है।

शहरी विकास निदेशालय  की माने तो  देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी और काशीपुर में ड्रोन से पब्लिक प्रॉपर्टी की जीआईएस मैपिंग का ये बेहद अहम अभियान शुरू होगा और इसके नतीजे सही आने के बाद निदेशालय की ओर से 14 अन्य शहरों में मैपिंग कराई जाएगी। इसमें सभी आठ नगर निगम क्षेत्र शामिल हैं।

 अब आपको ये भी बता दें कि आखिर ये ड्रोन सर्वे होगा कैसे – 

इस टेक्निकल सर्वे में हाईटेक और शार्प 150 से 200 फीट की ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसकी क्वालिटी ऐसी है कि वह आसानी से ज़मीन पर बने निर्माण की तस्वीरें रिकॉर्ड कर लेगा।  इससे तस्वीर लेते वक्त उस क्षेत्र की देशांतर और अक्षांश की जानकारी भी सटीक मिल जाएगी। ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम टेक्निक से  बेस मैप के साथ ही शहर के सार्वजनिक स्थानों की भी जानकारी अपडेट हो जाएगी। जीआईएस मैप के आधार पर ही संबंधित शहरों के निकायों की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स का निर्धारण किया जाएगा। अब देखना होगा कि जब ड्रोन आसमान में उड़ेगा तो किनते टैक्स चोरों की कुंडली कैमरे में क़ैद होगी और कितना राजस्व सरकार के खाते में जुड़ेगा

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