Sunday, June 23, 2024
उत्तराखंडराज्य

Uttarakhand – देवभूमि में हरेला की धूम , रिकॉर्ड संख्या में रोपे गए नए पौधे , CM ने दी बधाई 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को समर्पित ‘हरेला’ पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। यह त्योहार सम्पन्नता, हरियाली, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। 

जी रये जागि रये, यो दिन-बार भेटनै रये। धरती जस अगाव, आकाश जस चकव होये, सियक जस तराण, स्यावे जसि बुद्धि हो। दूब जस पंगुरिये। हिमालय में ह्यो, गंगा में पाणी रौन तक बचि रये..। इसी आशीर्वचन के साथ गुरुवार को कुमाऊं भर के घरों में हरेला पूजन किया गया।

प्रकृति पूजन का प्रतीक हरेला लोक पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हरेले के साथ ही कुमाऊं में श्रावण मास और वर्षा ऋतु का भी आरंभ हो गया। हरेले के तिनके ईष्टदेव को अर्पित कर धन-धान्य एवं सुख-समृद्धि की कामना की गई। घरों में पकवान बनाए गए। इससे पहले बुधवार शाम घरों में मिट्टी के शिव, पार्वती, गणेश बनाकर डेकर पूजन की परंपरा निभाई गई।

आपको बता दें कि उत्तराखंड में हरेला पर्व को वृक्षारोपण त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है। श्रावण मास में हरेला पूजने के बाद पौधे लगाए जाने की भी परंपरा रही है।  हरेला पर्व पहाड़ के लोक संस्कृति, प्रकृति और पर्यावरण के साथ जुड़ाव का भी प्रतीक है। प्रकृति को महत्व देने की इस त्यौहार का मुख्य उद्देश्य है। प्रकृति के विभिन्न रूपों की लोग पूजा करते हैं। जानकार इन परंपराओं को निभाने का  वैज्ञानिक आधार भी मानते है।

आज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरेला पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में पौधा लगाया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पर्यावरण को समर्पित हरेला पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। यह त्यौहार संपन्नता, हरियाली, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। श्रावण मास में हरेला पूजने के उपरांत पौधे लगाए जाने की भी प्रदेश की परंपरा रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि हमारे लोकगीत और लोकपर्व प्रकृति से जुड़ाव के साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। ये बेहतर जीवन जीने का भी मार्गदर्शन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा की हरेला हरियाली और ऋतुओं का पर्व है। हमें प्रकृति संरक्षण और प्रेम की अपनी संस्कृति के साथ ही उत्सवों को मनाए जाने की परंपरा को बनाए रखना होगा। उन्होंने सभी से इस महत्वपूर्ण अवसर पर सक्रिय भागीदारी के साथ हर व्यक्ति से एक पौधा लगाने की अपील की है। हरेला पर्व के अवसर पर गुरुवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र मालदेवता क्षेत्र के अस्थल में आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ  भी किया। 

पुरोला और मोरी में हरेला पर्व की शुरुआत 

टौंस वन प्रभाग की ओर से उत्तरकाशी के पुरोला और मोरी में हरेला पर्व की शुरुआत की गई। यह अभियान दो सप्ताह तक चलेगा। इसके में तीन हजार पौधों को रोपने का लक्ष्य रखा गया है। बुधवार को वन विभाग ने ग्राम पंचायत धेवरा व सुनाली बीट के वन भूमि पर कर्मचारियों, ग्रामीणों ने बांज, आंवला, भीमल, रीठा, कचनार, डंकन आदि प्रजाति के 500 से अधिक पौधों का रोपण किया। वहीं हरेला पर्व पर रामा व कमल सिरांई क्षेत्र की वन व ग्राम पंचायत के पन घट, गोघट, चाल, खाल, नदी नालों के पास खाली भूमि पर 4 हजार से अधिक छायादार, चारापत्ति व फलदार पौधे रोपने का लक्ष्य निधारित किया गया।

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