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यूक्रेन के बाद रूस और अमेरिका के बीच भी बढ़ा तनाव, नाटो देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिका ने भेजे 6 लड़ाकू विमान

बेल्जियम-रूस की सीमा पर 1 लाख से ज्यादा सैनिकों को तैनात करने के बाद अमेरिका और रूस के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। जिसके कारण नाटो देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिका यूरोप में अपने सैनिकों को तैनात कर रहा है। नाटो संगठन के अनुसार नाटो देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिका ने अपने 6 लड़ाकू एयरक्राफ्ट भेजे हैं। नाटो संगठन ने शुक्रवार की प्रेसवार्ता में कहा कि अमेरिका ने बाल्टिक देशों के एयर पुलिसिंग मिशन के तहत ये फाइटरजेट भेजे हैं। बेल्जियन और अमेरिका एअरफोर्स ने मिलकर लातविया, एस्टोनिया और लिथुआनिया जैसे बाल्टि देशों की सुरक्षा के लिए अपनी सुरक्षा गतिविधियाँ इस इलाके में बढ़ा दी हैं। यूएस एयरफोर्स के अधिकारियों के अनुसार एयरक्राफ्ट की तैनाती का उद्देश्य नाटो देशों की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करना है। क्योंकि रूस ने एक लाख से ज्यादा सैनिक यूक्रेन सीमा पर तैनात कर रखे हैं। यही करण है कि अमेरिका ने यूरोप में अपनी सैनिक गतिविधि बढ़ा दी है। रूस के हमला करने के खतरे की वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन इस हफ्ते करीब 2 हजार सैनिक पोलैंड और जर्मनी भेज रहे हैं। जर्मनी से भी 1000 सैनिक रोमानिया पहुंच रहे हैं।

nato

रुस यूक्रेन के हालात इस तरह बिगड़े

  • यूक्रेन की सीमा पश्चिम में यूरोप और पूर्व में रूस के साथ लगती है। 1991 तक यूक्रेन सोवियत संघ का सदस्य था। रूस और यूक्रेन के बीच तनाव 2013 से शुरू हुआ।
  • नवंबर 2013 में यूक्रेन की राजधानी कीव में तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच का विरोध शुरू हो गया। यानुकोविच को रूस का समर्थन था, जबकि अमेरिका-ब्रिटेन प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहे थे। फरवरी 2014 में यानुकोविच को देश छोड़कर भागना पड़ा।
  • इससे नाराज होकर रूस ने दक्षिणी यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। साथ ही वहाँ के अलगाववादियों को समर्थन दिया। अलगाववादियों ने पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। तब से ही रूस समर्थक अलगाववादियों और यूक्रेन की सेना के बीच लड़ाई चल रही है।
  • क्रीमिया वही प्रायद्वीप है। जिसे 1954 में सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता निकिता ख्रुश्चेव ने यूक्रेन को तोहफे के तौर पर दिया था। 1991 में जब यूक्रेन सोवियत संघ से अलग हुआ तो कई बार क्रीमिया को लेकर दोनों के बीच तनातनी होती रही।
  • दोनों देशों के बीच शांति कराने के लिए पश्चिमी देश आगे आए। 2015 में फ्रांस और जर्मनी ने बेलारूस की राजधानी मिन्स्क में रूस-यूक्रेन के बीच शांति समझौता भी किया। इसमें संघर्ष विराम पर सहमति बनी।
  • रूस की वजह से यूक्रेन पश्चिमी देशों से अपने रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश में जुटा है, जबकि रूस इसके खिलाफ है। सदस्य न होने के बावजूद यूक्रेन के NATO से अच्छे सम्बंध हैं। 1949 में सोवियत संघ का मुकाबला करने के लिए नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) की स्थापना हुई थी।
  • अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया के 30 देश इस संगठन के सदस्य हैं। ट्रीटी के मुताबिक, अगर संगठन के किसी सदस्य देश पर तीसरा देश हमला करता है तो NATO के सभी सदस्य देश एकजुट होकर उसका मुकाबला करेंगे।
  • रुस की मांग है कि NATO यूरोप में अपने विस्तार पर रोक लगाए। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले हफ्ते चेताते हुए कहा था कि अगर रूस के खिलाफ NATO यूक्रेन की जमीन का इस्तेमाल करता है तो अंजाम भुगतना होगा।
  • यूक्रेन NATO में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। उधर रूस की चेतावनी पर NATO ने कहा है कि रूस को इस प्रक्रिया में दखल देने का अधिकार नहीं है।
  • रूस को डर है कि अगर यूक्रेन NATO का हिस्सा बन गया और आगे युद्ध हुआ तो गठबंधन के देश उस पर हमला कर सकते हैं। ऐसे में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा बढ़ गया है।

 

 

 

 

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