Wednesday, November 30, 2022
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पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्रीे की पुण्यतिथि आज, जानिए उनका जीवनकाल का इतिहास

आज पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री की पुण्‍यतिथि है। आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का 11 जनवरी सन् 1966 में ताशकंद में देहांत हुआ था। लाल बहादुर शास्‍त्री की सादगी की तस्वीरें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है, और सोसियल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रहती हैंं। लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। देश के लिए कई दशकों तक पूरे समर्पण भाव से काम करने वाले शास्त्री को उनकी जबर्दस्त कार्यनिष्ठा, और विनम्र स्वभाव के लिए याद किया जाता है।

जानते है लाल बहादुर शास्‍त्री के जीवन काल का इतिहास

लाल बहादुर शास्‍त्री बचपन से ही शांत स्वभाव के थे। केवल 18 माह की उम्र में पिता का देहांत हो गया था, जिसके बाद उनका लालन-पालन अपने ननिहाल में हुआ। साथ ही अपनी प्राथमिकता शिक्षा भी उन्होंने आपने ननिहाल से ही जारी की थी। वह बचपन से ही पढ़ने में सक्षम थे। शास्‍त्री अपने जीवन काल से लोकमान्य तिलक और महात्मा गाँधी से प्रेरित थे।

  • महज 12 साल की कच्ची उम्र में ही लाल बहादुर शास्‍त्री इतने समझदार थे कि उन्होंने जाति उपनाम न लगाने का फैसला किया। उसके बाद से ही उन्होंने कभी अपने नाम में श्रीवास्‍तव नहीं लिखा।
  • आगे चलकर भी 1920 में, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए थे। लाल बहादुर शास्‍त्री महज 17 साल की उम्र में पहली बार असहयोग आंदोलन के दौरान जेल गए थे।
  • 1930 में, उन्होंने गांधी जी के नमक सत्याग्रह में भाग लिया और दो साल से अधिक समय तक जेल में रहे
  • 1942 में महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के बाद उन्हें 1946 तक जेल में रहना पड़ा।
  • 1956 में महबूब नगर में हुए रेल हादसे की जिम्‍मेदारी लेते हुए रेलमंत्री का पद से इस्‍तीफा दे दिया था।
  • पंडित जवाहर लाल नेहरू के अचानक निधन के बाद 9 जून 1964 को शास्त्री जी देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने। करीब 18 महीने तक प्रधानमंत्री रहे।
  • शास्त्री ने 1965 के युद्ध में पाकिस्‍तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। जिसके बाद उन्होंने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान चलाया, जिसे ‘श्वेत क्रांति’ के रूप में जाना जाता है। साथ ही उनके कार्यकाल में हुई ‘हरित क्रांति’ के जरिए देश में अन्न का उत्पादन बढ़ा।

आज भी लाल बहादुर शास्त्री की मौत की गुथी एक उलझन बनी हुई है। आपको बता दें कि वर्ष 1965 में पाकिस्तान के साथ एक समझौते के दौरान हस्ताक्षर करने के लिए वह ताशकंद गए थे। पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के साथ 10 जनवरी 1966 को ताशकंद समझौता हुआ और इस समझौते के महज 12 घंटे बाद 11 जनवरी के तड़के 1 बजे के बाद शास्त्री की मौत की खबर सामने आयी। लेकिन कोई नहीं जानते की वहां उस वक्त हुआ क्या था। शास्त्री की मौत के बाद उनके रिश्तेदारों और उनके जानने वालों ने उनकी अचानक मौत को षड्यंत्र बताया था। कहा जाता है कि शास्त्री जी मौत से आधे घंटे पहले तक बिल्कुल ठीक थे, लेकिन 15 से 20 मिनट में उनकी तबियत खराब हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें इंट्रा-मस्कुलर इंजेक्शन दिया। इंजेक्शन देने के चंद मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई थी। लेकिन आज भी भारत उनके योगदान को याद करता है।

 

 

 

 

 

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