Wednesday, May 22, 2024
उत्तराखंड

अब नहीं होगा जौलीग्रांट एयरपोर्ट का विस्तार! सरकार नये इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कवायद में जुटी

देहरादून- राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड में नये अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण की कवायद तेज कर दी है। इन दिनों सरकार नये एयरपोर्ट के लिये हरिद्वार और देहरादून के बीच जमीन तलाश रही है। इससे पहले सरकार की योजना जौलीग्रांट एयरपोर्ट का विस्तारीकरण कर उसे अंतरारष्ट्रीय हवाई अड्डे के तौर पर विकसित करने की थी। लेकिन अब जबकि सरकार जौलीग्रांट एयरपोर्ट के बजाय अलग से नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है तो साफ है कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट का विस्तार नहीं किया जाएगा। यहां तक कि आने वाले समय में जौलीग्रांट एयरपोर्ट का अस्तित्व भी पूरी तरह खत्म हो सकता है।

राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड को अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा से जोड़ने की कवायद तेज कर दी है। इसके लिये हरिद्वार-देहरादून के बीच 800 एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। जहां सरकार उत्तराखण्ड के पहले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण करेगी। इसे तैयार करने के लिए पांच किमी लंबी और आधा किमी चैड़ी हवाई पट्टी की आवश्यकता पड़ेगी। सरकार की कोशिश है कि 2030 तक इस अत्याधुनिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन शुरू कर दिया जाए। सरकार ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है। इन दिनों यह कमेटी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिये भूमि का चयन करने में जुटी है।

अब बड़ा सवाल है कि अगर राज्य में अलग से एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया जाएगा तो जौलीग्रांट एयरपोर्ट का क्या होगा। इसका सीधा सा जवाब है नये इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बनते ही जौलीग्रांट एयरपोर्ट का अस्तित्व पूरी तरह से मिट जाएगा। जी हां, सरकार जिस प्लान पर काम कर रही है उसका मतलब यही है। क्योंकि सरकार का पूरा फोकस अब नये इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अत्याधुनकि सुविधाओं से लैस करने की ओर है। वैसे महज 60 से 70 किमी की जमीनी दूरी के बीच दो एयरपोर्ट होने का कोई औचित्य भी नहीं है। ऐसे में जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विरान पड़ने की पूरी संभावना है।

आपको बता दें कि इससे पहले राज्य सरकार ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से विकसित करने की योजना बनाई थी। इसके लिये जौलीग्रांट एयरपोर्ट के आस-पास 105 हेक्टेयर भूमि चिन्हित भी कर ली गई थी। अनुमान था कि इसमें 285 करोड़ का खर्चा आयेगा। मगर इसके बावजूद जौलीग्रांट एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मानक पूरे नहीं कर पा रहा था। जिसके बाद अब सरकार ने एक अलग अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने का फैसला लिया है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनने के बाद विदेशों से सीधी फ्लाइट उत्तराखण्ड आ सकती है। सरकार इस योजना को पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। यानी अगले 9 सालों में जौलीग्रांट एयरपोर्ट इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा।

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