Tuesday, April 23, 2024
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ITDA देहरादून  ने E Waist से तैयार की अनोखी Canteen 

देहरादून में तैयार हो रही अनोखी कैंटीन 

ITDA ने आई टी पार्क में कबाड़ से सजाया कैंपस 

हज़ारों डीवीडी और कंप्यूटर मॉनिटर का हुआ इस्तेमाल 

कबाड़ हो चुकी एलसीडी और सीपीयू से बनायीं मेज़ कुर्सियां 
इन्वर्टर बैटरियों से तैयार किया गार्डेन और कैंटीन वॉल 
ITDA डायरेक्टर अमित सिन्हा की अनोखी पहल का नज़ारा 
जल्द मुख्यमंत्री करेंगे अनोखे कैंटीन का उद्घाटन 

 
इंसान अपनी सोच और क्रिएटिविटी से हमेशा कुछ अनोखा करता है …. ऐसा ही अनोखा प्रयोग दिखाई डे रहा है देहरादून के आई टी पार्क में मौजूद ITDA यानी सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी के मुख्यालय में …. आई टी पार्क में मौजूद आईटीडीए में उत्तराखंड की पहली ऐसी कैंटीन तैयार की जा रही है  जो कि पूरी तरह से ई-कचरे से बनी हुई है।
इसमें खराब हो चुके सैकड़ों कंप्यूटर और सीपीयू का इस्तेमाल किया गया है इसके साथ ही  खराब बैटरी से बाउंड्रीवॉल और गार्डन को सजाया गया है ।आज जब वैज्ञानिक पर्यावरण बचाने के लिए अलग अलग तरीकों से जागरूकता फैला रहे हैं ऐसे में  देहरादून आईटी पार्क स्थित आईटीडीए में पर्यावरण के लिए सबसे खतरनाक माने जाने वाले ई-कचरे का सबसे बेहतर उपयोग किया गया है।
जय भारत टीवी से बात करते हुए डायरेक्टर और सीनियर आईपीएस अमित सिन्हा ने बताया कि कई महीने की मेहनत के बाद आईटीडीए के दफ्तर परिसर में यह कैंटीन तैयार की गई है जिसका उद्घाटन जल्द मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से कराने की योजना है। जब इस परिसर के अनोखेपन की बात करते हैं तो आपको बता दें कि  इसकी छत तैयार करने में करीब एक लाख खराब डीवीडी और सीडी का उपयोग किया गया है। दूर से देखने पर यह छत रंगीन नजर आती है। इसी प्रकार, कंप्यूटर के मॉनिटर का उपयोग करके कैंटीन के भीतर स्टॉल बनाया गया है।
छत पर पंखों के बजाय सीपीयू में इस्तेमाल होने वाले कूलिंग फैन को जोड़कर बड़ा पंखा बनाया गया है। कैंटीन की चारदीवारी भी खराब हुई बैटरियों से बनाई गई है। यहां टेबल में सीपीयू के मदर बोर्ड से जुड़े खराब पार्ट्स लगाए गए हैं। इसी प्रकार बैठने के लिए भी सीपीयू और दूसरे कंप्यूटर पार्ट्स की बॉडी का इस्तेमाल किया गया है। आईटीडीए का यह प्रयास प्रदेश में ई-कचरे को पर्यावरण में फैलने से बचाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
आईटीडीए ने फरवरी-मार्च में ई-कचरे के निस्तारण को लेकर प्रदेशभर से सुझाव भी मांगे थे। करीब 60 लोगों ने ई-कचरे के निस्तारण के सुझाव भेजे थे। ई-कचरा हमारे लिए इसलिए भी खतरनाक है कि इससे कैंसर का कारण बनने वाले कैडमियम, क्रोमियम, मर्करी जैसे हानिकारक रसायन निकलते हैं। इस लिहाज से यह कचरा सामान्य जैविक कचरे से भी अधिक खतरनाक है।
यहाँ बाहरी दीवार पर आम जनता के लिए बॉक्स भी बनाये गए हैं जिससे लोग अपने घरों का ई वेस्ट यहाँ रख सकें … तो आप भी अगर पर्यावरण बचाने की इस अनोखी मुहिम का दीदार करना चाहते हैं तो आई टी पार्क में आपका स्वागत है  

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