Thursday, February 22, 2024
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भारत में हिजाब पहनने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही लड़ाई, तो दूसरी तरफ ईरान देश में हिजाब मुक्ति को लेकर चलाया जा रहा कैंपेन

27 दिसंबर, 2021 जब कर्नाटक के उडुपी गवर्नमेंट कॉलेज से पहली बार भारत में हिजाब विवाद की शुरुआत हुई थी। मामले ने उस वक्त इतनी तूल पकड़ी कि इस विवाद को सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंचा दिया गया। लेकिन तब से लेकर आज तक सुप्रीम कोर्ट से कोई सटीक फैसला सामने नहीं आया है। बीतें 6 दिनों में भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जबरदस्त बहस हुई। बहस में पगड़ी, तिलक, क्रॉस, कुरान, संविधान इन सभी का भी जिक्र किया गया लेकिन तस्वीरें तब भी साफ़ नहीं हो पायी। वहीं ईरान देश में हिजाब को लेकर अलग तस्वीरें सामने आ रही है। ईरान की महिलाएं हिजाब से मुक्ति पाना चाहती है। हिजाब से मुक्ति के लिए कैंपेन चलाये जा रहें है। इसके लिए सोशल मीडिया में No To Hijab  हैसटैग भी चलाया जा रहा है। दरअसल घटना 13 सितंबर की है। 22 साल की महसा अमिनी अपने परिवार से मिलने तेहरान आयी थी। लेकिन युवती को हिजाब न पहनने की वजह से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ़्तारी के तीन दिन बाद पुलिस कस्टडी में ही 16 सितंबर को उसकी मौत हो गयी। बताया ये जा रहा है कि उसे तीन दिन तक पीटा गया। इस घटना के बाद नाराज महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। महिलाओं ने अपने बाल काटे और हिजाब भी जलाये। वहीं  महसा अमिनी के अंतिम संस्कार के दौरान भारी भीड़ ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की ‘तानाशाह का नाश हो’ जैसे नारे लगाए।  महिलाओं का कहना है कि ‘7 साल की उम्र से अगर हम अपने बालों को न ढकें तो हम न तो स्कूल जा सकते हैं और न ही नौकरी पर। हम इस लैंगिक रंगभेद शासन से तंग आ चुके हैं.’। बता दें कि ईरान में हिजाब उतारना वहां के काननू की नजर में एक क्राइम है और इसकी सजा दी जाती है।

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