Tuesday, June 18, 2024
उत्तराखंडदेहरादून

उत्तराखंड में चलेंगी ई-कोर्ट मोबाईल वैन, अब अदालत घर पहुंचेगी…

-आकांक्षा थापा

अगर आप कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाकर थक चुके हैं, तो यह खबर आपके लिए है। उत्तराखंड के 5 ज़िलों के लिए एक बड़ी खबर है.. जी हाँ, उत्तराखंड के इन 5 जिलों में मोबाईल कोर्ट शुरू होने वाली है। यानि अब आपको कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि ई-कोर्ट मोबाईल वैन के ज़रिये घर बैठे जल्द से जल्द मामलों को निपटाया जायेगा। 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के कैम्पस से इन मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जायेगा। इसी के साथ उत्तर भारत में पहली बार उत्तराखंड में मोबाइल ई कोर्ट की शुरुआत होगी।

इन 5 जिलों को मिली सौगात

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान ने बताया की उत्तराखंड के 5 जिलों को 5 मोबाईल वैन दी जायेंगी। पहले चरण में पांच पर्वतीय जिलों को योजना का लाभ मिलेगा, वहीँ दूसरे चरण में शेष आठ जिलों को भी जोड़ लिया जाएगा। रजिस्ट्रार जनरल ने बताया कि कुमाऊं के चम्पावत, पिथौरागढ़ व गढ़वाल के चमोली, उत्तरकाशी एवं टिहरी गढ़वाल में योजना की शुरुआत की जा रही है। यहां के लिए अत्याधुनिक उपकरणों से लैस वैन रवाना की जाएगी। ई-कोर्ट मोबाईल वैन पूरी तरह सुविधाओं से लैस होगी; कोर्ट रूम, प्रिंटर, कम्प्यूटर सहित इंटरनेट और अन्य ज़रूरी उपकारों से लैस होगा ताकि मामलों का त्वरित निपटारा किया जा सके। आपको बता दें की इन अदालतों में महिला व बच्चों को गवाही दर्ज कराने में प्राथमिकता दी जाएगी। उत्तराखंड देश में ई-कोर्ट मोबाईल वैन शुरू करने वाला पहला राज्य नहीं है, इससे पहले यह सेवा तेलंगाना में शुरू की गई है।

भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मिली सुविधा

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से न्याय मिलने में देरी हो जाती है… पीड़ितों को अदालत में पहुँचने में कठिनाई होती है, जिससे की उनके लिए पहाड़ों से कोर्ट का रास्ता बाधाओं से भरा हुआ होता है। अमूमन बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग वर्ग को ज़्यादा मुश्किलें झेलनी पड़ती है, इस कारण या तो न्याय मिलने मे देरी होती है, या तो पीड़ित खुद हार मान लेता है।

ई-कोर्ट मोबाईल वैन से होगी समय के साथ पैसे की भी बचत

रजिस्ट्रार जनरल ने बताया कि दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में महिला व बच्चों को खासकर गवाही देने में व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्हें लंबी दूरी तय करने के बाद अदालत में किसी कारणवश तय तिथि पर गवाही या बयान दर्ज नहीं हो पाता। इससे उनका समय और पैसा बर्बाद होता है। लेकिन अब मोबाइल ई कोर्ट से इस समस्या से निजात मिल जाएगी।

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