Monday, June 24, 2024
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देश के दुश्मन CHINA  पर BCCI मेहरबान – VIVO कंपनी देती है 440 करोंड़ सालाना 

Indian Premier League (IPL) trophy. (File Photo: IANS)
एक तरफ देश चीन की कायर हरकत के बाद से गुस्से में उबल रहा है …. चाइनीज़ प्रोडक्ट्स , इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल ऐप को बंद किया जा रहा है वहीँ देश में धर्म की तरह लोकप्रिय क्रिकेट के सबसे बड़ी संस्था बीसीसीआई चीन से दोस्ती निभाने पर तुली हुयी है। जी हाँ भारत के गृहमंत्री अमित भाई शाह एक तरफ जहाँ चीन को सबक सीखने की बात कह रहे हैं वहीँ उनके बेटे और बीसीसीसाई सचिव जय शाह की टीम चाइनीज़ कम्पनी के लिए  बाहें खोलने की बात कह रही है। बीसीसीसाई के  कोषाध्यक्ष अरुण धूमल की बातों को समझे तो पहली नज़र में तो यही लगता है की हिंदी चीनी भाई भाई के फार्मूले पर ही देश की क्रिकेट संस्था अभी आगे बढ़ेगी क्योंकि जब खुद कोषाध्यक्ष ने कह दिया कि चीनी कम्पनी से मिलने वाली रख से देश का भला होगा चीन का नहीं तो हालात आप आसानी से समझ सकते हैं अब ये अलग बात है कि देश भर में हमारे बीस बहादुर सैनिकों की शहादत के बाद से  ही देश में चीनी कंपनियों के बहिष्कार की मांग तेज हो गई है, लेकिन पैसे की चमक और करारे नोटों की खुशबु ही ऐसी है की इसके आगे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई को भारत के करोड़ों लोगों की भावना का एहसास ही नहीं हो पा रहा है। आईपीएल जैसे बेहद मुनाफे के खेल में चीनी कंपनी वीवो बड़ी प्रायोजक है जो हर साल बोर्ड को  440 करोड़ रुपए का मोटा चेक देती है  लिहाज़ा अब बोर्ड इस कमाई को छोड़ने के मूड में नहीं है।  आपको बता दें कि स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी वीवो इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल की स्पॉन्सर है ….
जय भीम टीवी अब ये सवाल उठा रहा है कि जब बीएसएनएल ने 4जी रिसोर्सेस अपग्रेडेशन के लिए चीनी उत्पाद प्रतिबंधित करने का फैसला किया है। बड़े बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स चाइना से वापस लिए जा रहे हैं और सबसे बड़ी बात ये कि खुद देश की करोड़ों जनता आज चाइना के खिलाफ लामबंद हो रही है तब इसी जनता के मनोरंजन के लिए बनाये गए क्रिकेट के मैदान  में देश की भावनाओं से बीसीसीसाई क्यों खेलना चाहता है  बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने बताया है कि वीवो से बोर्ड का करार 2022 तक है। इसके बाद ही स्पॉन्सरशिप का रिव्यू होगा यानी फिलहाल डीलिंग जारी रहेगी ये भी संयोग है की बीसीसीआई का यह बयान उस वक़्त  आया है जब रेलवे ने भी कहा है कि वह चीनी कंपनी को दिया सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन का 471 करोड़ का करार रद्द करेगा।
गलवान में भारत और चीन की सेनाओं के बीच झड़प और बीस जवानों की शहादत के बाद  इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन  भी चीनी कंपनी ली निंग से करार खत्म करने की बात कह रही है। हांलाकि इन सबके बीच बोर्ड का तर्क है कि अगर चीन का पैसा भारतीय क्रिकेट की मदद कर रहा है, तो हमें इससे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए … आपको यहाँ बता दें कि बीसीसीआई को चाइनीज कम्पनी वीवो से सालाना आईपीएल के लिए 440 करोड़ रूपये मिलते हैं और जिसके साथ पांच साल का करार 2022 में खत्म होगा… 

 

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