Wednesday, January 21, 2026
उत्तराखंडदेहरादून

देहरादून में पहली बार मिली दुर्लभ प्रजाति की छिपकली “येलो मॉनिटर लिज़र्ड”

-आकांक्षा थापा

राजधानी देहरादून में हरिद्वार बाईपास स्थित रिस्पना पुल के करीब पहली बार दुर्लभ जंगली छिपकली मिली है। प्रभागीय वनाधिकारी राजीव धीमान के अनुसार यह पहली बार है जब देहरादून में येलो मॉनिटर लिज़र्ड देखी गयी है। लोगो की सुचना पर वन विभाग की टीम ने फ़ौरन वहाँ पहुंचकर छिपकली को पकड़ा और उसे वापस जंगल में छोड़ दिया।
आपको बता दें की येलो मॉनिटर लिज़र्ड गंगा के किनारे घने जंगलों में रहती है, और राजधानी में इसका मिलना बेहद चौकाने वाली बात हैं…
दूसरी ओर, भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ सरीसृप विज्ञानी डॉ अभिजीत दास द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक येलो मॉनिटर लिज़र्ड भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की उस श्रेणी में शामिल है जिसमे शेर, बाघ जैसे अन्य जानवर शामिल हैं.. आम तौर पर लोग इसे ज़हरीला मानकर मार देते हैं, जबकि इसे मारने पर कड़ी सज़ा का प्रावधान है.. लोगों द्वारा ज़हरीली मानी जाने वाली यह छिपकली असलियत में ज़हरीली होती नहीं है. .. हालाँकि इतनी अलग किस्म की छिपकली लोगों के दिल में डर ज़रूर पैदा कर देती है. …

कहाँ पाई जाती है येलो मॉनिटर लिजर्ड?

मॉनिटर लिजर्ड की चार प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से येलो मॉनिटर लिजर्ड की संख्या सबसे कम है और ये सिर्फ गंगा के मैदानी क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं। दूसरी प्रजाति में डेजर्ट मॉनिटर लिजर्ड आती है जो राजस्थान, गुजरात के रेगिस्तानी इलाकों में पाई जाती हैं। तीसरी प्रजाति बंगाल मॉनिटर लिजर्ड है जो देश के ज्यादातर राज्यों में पाई जाती हैं। वहीं मॉनिटर लिजर्ड की चौथी प्रजाति वॉटर मॉनिटर लिजर्ड है जो आकार में अन्य तीन मॉनिटर लिजर्ड से काफी बड़ी होती हैं। यह दक्षिणी राज्यों के साथ ही श्रीलंका में भी पाई जाती हैं। ये देहरादून में आबादी के बीच कैसे पहुंची, इस पर विभाग ने गोपनीय टीम लगाई है। इसके साथ ही, छिपकली के तस्करी कर यहां लाए जाने की भी आशंका जताई गई है।

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