अयोध्या के संतों को पांच कार्यक्षेत्रों में मिलेगा पूर्ण अधिकार, नई धार्मिक समिति गठित
राम मंदिर में अब सेवा और परंपरा के नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसके लिए अयोध्या के संतों को जोड़ते हुए एक नई धार्मिक समिति का गठन किया है। इस समिति में अयोध्या के पांच प्रमुख संतों के साथ ट्रस्ट के मूल संत भी शामिल हैं। स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि राम मंदिर अब सिर्फ निर्माण नहीं, सेवा और परंपरा के नए अध्याय में प्रवेश कर रहा है, जिसमें अयोध्या के संतों की भूमिका सबसे अहम होगी।
बुधवार को ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव व संत स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज हरिद्वार के कनखल स्थित आश्रम में पहुंचे। उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से आशीर्वाद लिया और अयोध्या में किए जा रहे विकास कार्य से लेकर परिवर्तन और कई व्यवस्थाओं में नवाचार को लेकर चर्चा की।
स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि कुल पांच कार्यक्षेत्र हैं जिन पर अयोध्यावासियों का पूर्ण अधिकार है, वह निर्णय लेंगे। नव गठित समिति में भगवान की सेवा-पूजा की पद्धति और मंदिर के सभी उत्सवों की तिथि व स्वरूप का निर्धारण सदस्यों की कार्यकारिणी करेगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में जन्माष्टमी पर पहली बार रात्रि में श्री कृष्ण झूला उत्सव का आयोजन किया गया।
मंदिर परिसर के यज्ञ स्थल में प्रतिदिन पंच देवता यज्ञ विधिवत शुरू हो गया है। सुबह की शृंगार आरती को भी अधिक व्यवस्थित और नए स्वरूप में किया गया है। वैष्णव परंपरा के अनुसार मंदिर में प्रतिदिन संत पदगान (भजन-कीर्तन) कर रहे हैं। स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि शृंगार आरती से शयन आरती तक एक स्थल चिह्नित कर श्री राम जय राम जय जय राम विजय मंत्र का अखंड संकीर्तन भी जल्द शुरू होगा।
