क्या होगा मलिन बस्तियों का, अध्यादेश की मियाद हुई खत्म
उत्तराखंड की मलिन बस्तियों को बचाने के लिये लाया गये अध्यादेश की समय सीमा 23 अक्टूबर को समाप्त होने जा रही है। जिसके चलते एक बार फिर मलिन बस्तियों के उजड़ने की नौबत आ गई है।
आपको बता दें कि साल 2017 में हाईकोर्ट के एक आदेश से मलिन बस्तियों का अस्तित्व खतरे में आ गया था। जिसके बाद सरकार को 2018 में एक अध्यादेश लाना पड़ा था। जिसके तहत सरकार ने चरणबद्ध तरीके से मलिन बस्तियों का पुनर्वास करने की बात कहते हुये मलिन बस्तियों को उजड़ने से बचा लिया। यानी तीन साल के लिए मलिन बस्तियों पर से खतरा टल गया। इसके बाद साल 2021 में जब इस अध्यादेश की मियाद खत्म हुई तो फिर से सरकार अध्यादेश ले आई। तीन साल के लिये लाये गये इस अध्यादेश की समय सीमा एक बार फिर खत्म हो रही है। और तरीख है 23 अक्टूबर।
लेकिन माना जा रहा है कि सरकार एक बार फिर से मलिन बस्तियों के लिए अध्यादेश ला सकती है। इस मामले को लेकर शहरी विकास मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने भी साफ किया है कि मलिन बस्तियों के हक में सरकार फैसला लेगी। आज ही इसे लेकर निर्णय ले लिया जाएगा।
अगर ऐसा नहीं होता तो कल के बाद राज्य की साड़े पांच सौ से अधिक मलिन बस्तियों का अस्तित्व संकट में आ जाएगा।
