Saturday, April 13, 2024
उत्तराखंडदेहरादून

लोकपर्व हरेला 2021: आज से हरेला उत्सव शुरू, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी शुभकामनाएं

-आकांक्षा थापा

आज से उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला की शुरुआत हो गई है…. ‘हरेला’ एक हिंदू त्यौहार है जो मूल रूप से उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में मनाया जाता है। एक दूसरे की उन्नति, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के साथ आज से लोक पर्व हरेला का उत्सव शुरू हो गया है। वहीँ, आज से ही पवित्र सावन मास शुरू होने से इस पर्व की महत्ता भी बढ़ गई है। सुबह पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा अर्चना के बाद पौधा रोपण अभियान शुरू हो गया। विभिन्न स्थानों पर छायादार, फलदार एवं औषधीय पौधे लगाकर धरती को हरा-भरा रखने का संकल्प लिया गया। पौधा रोपण अभियान पूरे दिन चलेगा।

आपको बता दें, इस बार देहरादून जिला प्रशासन की ओर से हरेला पर्व पर चार लाख से अधिक पौधे लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से दो लाख 15 हजार पौधे सिर्फ वन विभाग की ओर से लगाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, नगर निगम प्रशासन की ओर से दस हजार व मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की ओर से 15 हजार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। नगर पंचायतों, जिला पंचायत, ग्राम पंचायतोें के जरिए पौधरोपण किया जा रहा है।
जहाँ पिछले साल हरेला पर्व के दिन एक घंटे में तीन लाख 71 हजार पौधे लगाने का रिकार्ड कायम हुआ था वहीँ, इस बार इस रिकॉर्ड को तोड़ने की तैयारी है। हरेला अभियान के दौरान रातरानी, बेला, चंपा, चमेली जैसे सुगंधित फूलों के साथ ही आम, अमरूद, जामुन, कटहल, आंवला, नीबू, लीची जैसे फलदार पौधे लगाए जाएंगे। शीशम, हरड़, बहेड़ा, बेलपत्र, संदन, महल, तेजपात, अमलतास, कनजी, कंजू, कचनार, बांस, टिकोमा, पिलन, अर्जुन, मौरेंग, जामुन, आदि प्रजातियों के पौधे भी रोपे जाएंगे।

सीएम धामी ने उत्तराखंड वासियों को हरेला पर्व की बधाई दी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को समर्पित ‘हरेला’ पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। यह त्योहार संपन्नता, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई एवं अगस्त माह का समय पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त है। हमें अपनी परंपराओं एवं परिवेश को बढ़ावा देना होगा। प्रकृति को महत्व देने की हमारी परंपरा रही है। हरेला सुख-समृद्धि व जागरूकता का भी प्रतीक है। आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा व वातावरण मिल सके इसके लिए सबको वृक्षारोपण व पर्यावरण संरक्षण की ओर ध्यान देना होगा। यह पर्व ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ने का संदेश भी देता है।har

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